प्रॉपर्टी रजिस्ट्री के नए नियम लागू, ये 5 कागज नहीं तो रजिस्ट्री होगी रद्द Land Registry Documents

Land Registry Documents : भारत में अपना मकान या जमीन खरीदना हर परिवार का सबसे बड़ा सपना होता है। सालों की मेहनत, बचत और त्याग के बाद जब यह सपना साकार होने लगता है, तो छोटी-सी गलती पूरे सपने को बर्बाद कर सकती है। आजकल जमीन-जायदाद से जुड़े फर्जीवाड़े और धोखाधड़ी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इन्हीं को रोकने के लिए सरकार ने प्रॉपर्टी रजिस्ट्री के नियमों को और भी सख्त और पूरी तरह डिजिटल बना दिया है।

अब बिना इन 5 मुख्य दस्तावेजों के रजिस्ट्री प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ेगी। अगर आप भी जल्द ही प्रॉपर्टी खरीदने वाले हैं, तो इस लेख को अंत तक जरूर पढ़ें। यहां आपको लैंड रजिस्ट्री डॉक्यूमेंट्स की पूरी जानकारी मिलेगी जो आपको लाखों रुपये के नुकसान और कानूनी झंझटों से बचा सकती है।

पैन कार्ड अब दोनों पक्षों के लिए अनिवार्य

प्रॉपर्टी रजिस्ट्री के नए नियमों के तहत खरीदार और विक्रेता दोनों को अपना पैन कार्ड देना जरूरी है। बिना वैध पैन कार्ड के रजिस्ट्री ऑफिस में दस्तावेज स्वीकार ही नहीं किए जाएंगे।

इस नियम का मुख्य उद्देश्य है बड़े लेन-देन पर नजर रखना और ब्लैक मनी को पूरी तरह रोकना। पहले नकद में भारी रकम का लेन-देन आसानी से हो जाता था, लेकिन अब आयकर विभाग हर ट्रांजेक्शन की निगरानी कर रहा है।

टिप: रजिस्ट्री से पहले अपना पैन कार्ड आधार से लिंक करवाएं और उसकी वैधता चेक कर लें। अगर पैन में कोई त्रुटि निकली तो रजिस्ट्री में देरी हो सकती है।

आधार कार्ड + बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन अनिवार्य

अब सिर्फ कागज दिखाने से काम नहीं चलेगा। रजिस्ट्री के समय खरीदार और विक्रेता दोनों का आधार कार्ड और बायोमेट्रिक सत्यापन (फिंगरप्रिंट या आईरिस स्कैन) जरूरी है।

यह व्यवस्था नकली पहचान पत्रों और बुजुर्गों की जमीन हड़पने वाली घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए बनाई गई है। खासकर गांव-कस्बों में यह सुरक्षा कवच बहुत कारगर साबित हो रहा है।

सलाह: आधार को अपडेट रखें और मोबाइल नंबर लिंक जरूर करवाएं। बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन फेल होने पर रजिस्ट्री तुरंत रुक जाएगी।

खसरा-खतौनी और ऑनलाइन भूमि रिकॉर्ड

जमीन की असली पहचान खसरा और खतौनी ही है। इनमें जमीन का सही क्षेत्रफल, मालिक का नाम, खाता नंबर और भूमि का प्रकार साफ-साफ दर्ज होता है।

आज ज्यादातर राज्यों में ये सभी रिकॉर्ड डिजिटल हो चुके हैं। आप घर बैठे अपने राज्य के भूलेख पोर्टल (Bhulekh) पर जाकर पूरी जानकारी देख सकते हैं।

जरूरी चेकलिस्ट:

  • जमीन पर कोई विवाद तो नहीं है?
  • पिछले 30 साल में कितनी बार मालिक बदला?
  • कोई गिरवी या कोर्ट केस तो नहीं?

ये जानकारी चेक करने से आप एक ही जमीन को दो-तीन लोगों को बेचने वाले फर्जीवाड़े से बच सकते हैं।

संपत्ति पर बकाया टैक्स और सरकारी बिल की पूरी जांच

रजिस्ट्री से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि संपत्ति पर कोई पुराना बकाया तो नहीं है। नगर निगम प्रॉपर्टी टैक्स, पानी-बिजली बिल, भूमि राजस्व या कोई अन्य सरकारी देय राशि बाकी होने पर रजिस्ट्री रुक सकती है।

कई बार खरीदार बिना जांच किए सौदा कर लेते हैं और बाद में पुराने बकाये उन्हें चुकाने पड़ते हैं। इसलिए विक्रेता से पिछले 3 साल के सभी टैक्स रसीदें मांगें और खुद संबंधित विभाग से नो ड्यूज सर्टिफिकेट ले लें।

पूरी तरह डिजिटल रजिस्ट्री प्रक्रिया

अब कई राज्यों में रजिस्ट्री 100% ऑनलाइन हो गई है। ऑनलाइन आवेदन, दस्तावेज अपलोड, स्टांप ड्यूटी पेमेंट और फाइनल रजिस्ट्री – सब कुछ घर बैठे संभव है।

इससे समय बचता है, बिचौलियों की भूमिका खत्म होती है और पारदर्शिता बढ़ती है। हालांकि हर राज्य के नियम थोड़े अलग-अलग हो सकते हैं, इसलिए अपने राज्य की आधिकारिक वेबसाइट (जैसे Maharashtra Bhumi Abhilekh या UP Bhulekh) पर जानकारी अवश्य चेक करें।

अंतिम सलाह: सतर्कता ही सबसे बड़ी सुरक्षा

प्रॉपर्टी खरीदना जीवन का सबसे बड़ा वित्तीय फैसला होता है। जल्दबाजी कभी न करें। ऊपर बताए गए 5 दस्तावेजों की डबल चेकिंग जरूर करें। अगर हो सके तो किसी अनुभवी प्रॉपर्टी वकील या लीगल एक्सपर्ट से सलाह ले लें।

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